काली महाकाली video

महाकाली सनातन हिन्दू शिव शिव धर्म की देवी जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की प्रमुख शक्ति हैं।

यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और शक्तिशाली रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों असुरों को नष्ट करने, दुष्ट प्रवृतियों को नाश कऱ भक्तों के अन्दर ऊर्जा उत्पन्न करती ही है ,परन्तु सभी प्राणीयों में कर्मानुसार फल भी प्रदान करती है ।

वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रक्षा ओर देखभाल करती है।

काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है। इनको महाकाली भी कहते हैं।

काली

संबंध
महाविद्या, देवी
निवासस्थान
शमशान
अस्त्र
खप्पर मुण्ड = मुण्डमाला
जीवनसाथी
शिव जी
सवारी
शव
भगवती काली दसमहाविद्याओं में प्रथम स्थान पर हैं। काली देवी को आद्य महाविद्या भी कहा गया है। भगवती काली का रूप अत्यंत भयंकर है, परन्तु ये देवी अपने भक्तों के हर इच्छाओं को पूर्ण करने वाली, दयामयी हैं। तंत्र ग्रंथों में भगवती महाकाली के अनेको रूपों का वर्णन किया गया है एवं अनेकों साधना विधान बताये गए हैं, परन्तु तंत्र का अनुसरण और तांत्रिक साधनाएँ अत्यंत दुरूह भी हैं।

माँ महाकाली में अनन्य भक्ति एवं अटूट विश्वास रखकर कोई भी मनुष्य उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है।

काली देवी की साधना हर प्रकार के मनोकामनाओं की पूर्ति एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए की जाती है।

चामुंडा

शुम्भ और निशुम्भ के सेनापति चंड और मुंड का वध करने के कारण देवी काली का एक नाम चामुण्डा देवी भी है , जो कुंडलिनी जागरण ओर मूलाधार चक्र में बहुत ही मजबूत आधार बनाने में सहायक होती है.

रणचंडी

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार शुम्भ और निशुम्भ दो भाई थे जो महर्षि कश्यप और दनु के पुत्र तथा नमुचि के भाई थे।

देवीमहात्म्य में इनकी कथा वर्णित है।

इंद्र ने एक बार नमुचि को मार डाला। रुष्ट होकर शुंभ-निशुंभ ने उनसे इंद्रासन छीन लिया और शासन करने लगे। इसी बीच दुर्गा ने महिषासुर को मारा और ये दोनों उनसे प्रतिशोध लेने को उद्यत हुए। इन्होंने दुर्गा के सामने शर्त रखी कि वे या तो इनमें किसी एक से विवाह करें या मरने को तैयार हो जाऐं। दुर्गा ने कहा कि युद्ध में मुझे जो भी परास्त कर देगा, उसी से मैं विवाह कर लूँगी। इस पर दोनों से युद्ध हुआ और दोनों मारे गए।

Mahakali video
Mahakali

महाकाली के रुप व वीडियो

महाकाली

काली की गुप्त शक्ति
Maha kali shakti
1 – kerkasni ( kam krodh nasht)
2- shushakkanta (Heart atma  )
3- samaye trasani ( samaye dosh ko theek karti hai)
4-Guhevedni (purv janam ke dosh katati hai
काली की गुप्त शक्ति
Kerkesni
शुष्क कांता
समय त्रासनी
गुवेदनी

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महाकाली मंत्र साधना

महाकाली मंत्र

काली Maha Kali Tantra मंत्र
काली मां दुर्गा का ही एक स्वरुप है। मां दुर्गा के इस महाकाली स्वरुप को देवी के सभी रुपों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। दसमहाविद्याओं में काली का पहला स्थान माना जाता है। दुष्ट, अभिमानी राक्षसों के संहार के Oलिए मां काली को जाना जाता है। अक्सर काली की साधना सन्यासी या तांत्रिक करते ही करते हैं लेकिन मां काली के कुछ मंत्र ऐसे भी हैं जिनका जाप कर कोई भी साधक अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकता है।

सर्वप्रथम मंत्र सिद्ध महाकाली साधना सामग्री प्राप्त कर लें.

महाविद्या महाकाली साधना आप नवरात्रि के दिनों में भी कर सकते हैं ओर किसी शुभ मुहूर्त में भी कर सकते हैं ! महाविद्या महाकाली साधना रात में 9 बजे या उसके बाद की जाने वाली साधना हैं !

महाविद्या महाकाली साधना करने वाले साधक को स्नान करके शुद्ध काले वस्त्र धारण करके किसी काली मंदिर या अपने घर में किसी एकान्त स्थान या पूजा कक्ष में दक्षिण दिशा की तरफ़ मुख करके काले आसन पर बैठ जाए ! उसके बाद अपने सामने चौकी रखकर उस पर काला रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर प्लेट स्थापित कर उस प्लेट में रोली या काजल से त्रिकोण बनाये उस पर मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त “महाकाली यंत्र ” को स्थापित करें ! महाकाली यंत्र के सामने शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाये और मन्त्र विधान अनुसार संकल्प आदि कर सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग करे :

ॐ अस्य श्री दक्षिण कालिका मन्त्रस्य भैरव ऋषि रुष्णि दक्षिण कालिका देवता ह्रीं बीजं हूं शक्ति: क्रीं कीलकं ममा भीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोग:।ऋष्यादि न्यास : बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए अपने भिन्न भिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है ! मंत्र :

भैरवऋषये नम: शिरसि ( सर को स्पर्श करें )

उष्णिक् छन्दसे नम: मुखे ( मुख को स्पर्श करें )

दक्षिणकालिकादेवतायै नम: ह्रदये ( ह्रदय को स्पर्श करें )

ह्रीं बीजाय नमो गुहे ( गुप्तांग को स्पर्श करें )

हूं शक्तये नम: पादयोः ( पैरों को स्पर्श करें )

क्रीं कीलकाय नम: नाभौ ( नाभि को स्पर्श करें )

विनियोगाय नम: सर्वांगे ( पूरे शरीर को स्पर्श करें )

कर न्यास :

अपने दोनों हाथों के अंगूठे से अपने हाथ की विभिन्न उंगलियों को स्पर्श करें, ऐसा करने से उंगलियों में चेतना प्राप्त होती है ।ॐ क्रां अंगुष्ठाभ्यां नम: ।

ॐ क्रीं तर्जनीभ्यां नम: ।

ॐ क्रूं मध्यमाभ्यां नम: ।

ॐ क्रैं अनामिकाभ्यां नम: ।

ॐ क्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नम: ।

ॐ क्र: करतलकरपृष्ठाभ्यां नम: ।

ह्रदयादि न्यास :

पुन: बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रों के साथ शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है !

मंत्र :

ॐ क्रां ह्रदयाय नम: ( ह्रदय को स्पर्श करें )

ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा ( सिर को स्पर्श करें )

ॐ क्रूँ शिखायै वषट् ( शिखा को स्पर्श करें )

ॐ क्रैं कवचाय हुम् ( दोनों कंधों को स्पर्श करें )

ॐ क्रौं नेत्रत्रयाय वौषट ( दोनों नेत्रों को स्पर्श करें )

ॐ क्र: अस्त्राय फट् ( सिर के ऊपर से ऊँगली घुमाकर चारों दिशाओं में चुटकी बजाएं )

ध्यान :

इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर माँ भगवती महाकाली का ध्यान करके पूजन करें ! और धुप, दीप, चावल, पुष्प से महाविद्या महाकाली मन्त्र का जाप करें !

शवारुढ़ाम्महा भीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीम् ।

चतुर्भुजां खड्ग मुण्डवरा भयकरां शिवाम् ।।

मुण्ड मालाधरान्देवी लोलजिह्वान्दिगम्बरां ।

एवं संचिन्तयेत्काली शमशानालयवासिनीम्।।

ऊपर दिया गया पूजन सम्पन्न करके सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित “रुद्राक्ष माला” की माला से नीचे दिए गये मंत्र की 23 माला 11 दिनों तक जप करें ! और मंत्र उच्चारण करने के बाद काली कवच का पाठ करें !

22 अक्षरी

श्री दक्षिण काली मंत्र

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

इस मंत्र के जरिये दक्षिण काली का आह्वान किया जाता है। शत्रुओं के विनाश के लिए साधक इस मंत्र के जरिये मां काली की साधना करते हैं व सिद्धि प्राप्त करते हैं। तंत्र विद्या में मां काली की साधना के लिए यह मंत्र काफी लोकप्रिय है। इस मंत्र का तात्पर्य है अर्थ है कि परमेश्वरी स्वरुप जगत जननी महाकाली महामाया मां मेरे दुखों को दूर करें। शत्रुओं का नाश कर मां अज्ञानता का अंधकार मिटाकर ज्ञान का प्रकाश हो। वैसे भी मां काली ज्ञान, मोक्ष तथा शत्रु नाश करने की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी कृपा से समस्त दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं

एकाक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं

यह मां काली का एकाक्षरी मंत्र है। इसका जप मां के सभी रूपों की आराधना, उपासना और साधना में किया जा सकता है। मां काली के इस एकाक्षरी मंत्र को मां चिंतामणि काली का विशेष मंत्र भी कहा जाता है।तीन अक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं॥

मां काली की साधना व उनके प्रचंड रुपों की आराधना के लिए यह तीन अक्षरी मंत्र एक विशिष्ट मंत्र है। एकाक्षरी व त्रयाक्षरी मंत्रों को तांत्रिक साधना के मंत्र के पहले और बाद में संपुट की तरह भी लगाया जा सकता है।

पांच अक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्॥

माना जाता है कि इस पंचाक्षरी मंत्र का जाप प्रतिदिन प्रात:काल में 108 बार किया जाये तो मां काली साधक के सभी दुखों का निवारण करके उसके यहां धन-धान्य की वृद्धि करती हैं। पारिवारिक शांति के लिए भी इस मंत्र का जप किया जाता है।

षडाक्षरी काली मंत्र

ॐ क्रीं कालिके स्वाहा॥

इस षडाक्षरी मंत्र का जप सम्मोहन आदि तांत्रिक सिद्धियों के लिए किया जाता है। यह मंत्र तीनों लोकों को मोहित करने वाला है।

सप्ताक्षरी काली मंत्र

ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा॥

यह मंत्र भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह मंत्र कारगर माना जाता है।

श्री दक्षिणकाली मंत्र

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥

तांत्रिक इस मंत्र के जरिये दक्षिण काली की साधना कर सिद्धि प्राप्ति की कामना करते हैं। यदि आपको शत्रुओं का भय सता रहा है तो आप भी अपने गुरु के मार्गदर्शन में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

श्री दक्षिणकाली मंत्र

क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥

यह भी दक्षिण काली का एक प्रचलित मंत्र है। रोग दोष आदि को दूर करने के लिए इस मंत्र से साश्री दक्षिणकाली मंत्र

ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

इस मंत्र में भी विभिन्न बीज मंत्रों को सम्मिलित किया गया है जिससे मंत्र और अधिक शक्तिशाली हो जाता है। मां काली को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए तांत्रिक या सन्यासी इस मंत्र के द्वारा मां काली की साधना करते हैं।

श्री दक्षिणकाली मंत्र

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥

यह काली माता का एक विशिष्ट मंत्र है इसका प्रयोग भी तांत्रिक साधना में किया जाता है।

भद्रकाली मंत्र

ॐ ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा॥

मां भद्रकाली के इस मंत्र का प्रयोग शत्रुओं को वश में करने के लिये किया जाता है। शत्रुओं के तीव्र विनाश के लिये मां भद्रकाली की साधना की जाती है। मां भद्रकाली को धर्म, कर्म और अर्थ की सिद्धी देने वाली माना जाता है। साधक जिस भी कामना से भद्रकाली की साधना करता है, उनकी उपासना करता है, वह पूर्ण होती है।

श्री शमशान काली मंत्र

ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥

यह माना जाता है कि शमशान काली शमशान में वास करती हैं व शव की सवारी करती हैं। तंत्र विद्या के अनुसार शमशान काली की साधना शवारुढ़ यानि शव पर बैठकर की जाती है। इसलिए यह बहुत ही जटिल एवं अमानवीय साधना भी मानी जाती है जो कि सामाजिक व कानूनी रुप से लगभग प्रतिबंधित है। फिर भी लकड़ी आदि के टुकड़ों में प्राण प्रतिष्ठा कर उसे शव का रुप देकर भी तांत्रिक शमशान काली की साधना करते हैं। भूत-प्रेत, पिशाचादि को वश में करने के लिए शमशान काली की साधना की जाती है।

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।

शत्रु और मुक़दमे की समस्या से ऐसे पाएं मां काली की कृपा से मुक्ती-

– लाल वस्त्र धारण करके लाल आसन पर बैठें.

– मां काली के समक्ष दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं.

– मां को प्रसाद में पेड़े और लौंग अर्पित करें.

– इसके बाद “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का 13 माला जाप करें.

– शत्रु और मुक़दमे से मुक्ति की प्रार्थना करें.

– मंत्र जाप के बाद 10 मिनट तक जल का स्पर्श न करें.

– ये प्रयोग लगातार 27 रातों तक करें.

माता काली के समक्ष जलाएं दिव्य धूप-

– मुकदमे या कर्जे की समस्या हो तो नौ दिन देवी के समक्ष गुग्गुल की सुगंध की धूप पान के पत्ते पर रखकर जलाएं.

– अपने मन की इच्छा पूरी करने के लिए माता काली के सामने बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ भी उच्च स्वर में करें ऐसा लगातार 7 दिन करें.

नौकरी-व्यापार और धन की समस्या को खत्म करने के लिए करें दिव्य प्रयोग-

– 11 या 21 शुक्रवार मां कालिका के मंदिर जाएं.

– लाल आसन पर बैठकर ॐ क्रीं नमः 108 बार जपें.

– क्षमा मांगते हुए अपनी क्षमता अनुसार उन्हें चुनरी, नारियल, हार-फूल चढ़ाकर प्रसाद छोटी कन्याओं में बांटें.

– माता कालिका की पूजा में लाल कुमकुम, अक्षत, गुड़हल के लाल फूल और भोग में हलवे या दूध से बनी मिठाई भी अर्पण करें.

– पूरी श्रद्धा से मां की उपासना करें आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी. मां के प्रसन्न होते ही मां के आशीर्वाद से आपका जीवन बहुत ही सुखद होगा और नौकरी व्यापार और धन की समस्या तुरंत ही खत्म होगी.

Maha Kali

Maha Kali यंत्र माला

महाकाली वशीकरण मंत्र

माँ काली वशीकरण प्रयोगः मां काली के शक्तिशाली

मंत्र:

ओम ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अमुकं वश्यं कुरु कुरु स्वाहा

का कुल सवा लाख जाप कुल 11 दिनों में पूरा किया जाता है। जाप की शुरुआत शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन से की जाती है तथा इसके लिए उपयुक्त समय प्रातः छह से सात बजे की बीच होना चाहिए। जाप संबंधी अनुष्ठान के लिए श्वेत वस्त्र का आसन लगाया जाता है तथा

जाप मुंगे /मोती माला व यंत्र सामने रक्ख कर किया जाना चाहिए।
अंतिम दिन दशांश हवन से साधना की पूर्णहुति होती है। उसके बाद मंत्र को किसी सफेद कागज के वर्गाकार टुकड़े पर लिखकर उसे यंत्र का रूप दे दिया जाता है। मंत्र में अमुकं की जगह वशीकरण किए जाने वाले व्यक्ति का नाम लिखकर उसे घी के बर्तन में डुबा दिया जाता है। जब तक वह घी में डूबा रहता है तब तक उस व्यक्ति पर वशीकरण का प्रभाव बना रहता है।

सरल वशीकरण प्रयोगः किसी व्यक्ति को अपने वश में करने के लिए मां काली की उपासना का फल मिलने वाला एक सरल वशीकरण उपाय है, जिसका प्रयोग कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को करना चाहिए। इस दिन मंगलवार हो तब और भी अच्छा है। इस सरल उपाय के लिए केवल कत्था लगा पान का पत्ता उपयोगी वस्तु है। जिस किसी व्यक्ति का वशीकरण किया जाना है उसका नाम लेकर निम्न मंत्र का जाप 100008 बार जाप कर के पहले सिद्ध कर लें ।

माँ काली मंत्रः

ओम ह्रीं क्लीं अमुकी क्लेदय क्लेदय आकर्षय आकर्षय,मथ मथ पच पच द्रावय द्रावय मम सन्निधि आनय आनय,हुं हुं ऐं ऐं श्रीं श्रीं स्वाहा।

इसमें अमुक के स्थान पर वशीकरण किए जाने वाले का नाम लिया जाना चाहिए। अंत में पान पर तीन फूंक मार दिया जाता है। इस तरह से अभिमंत्रित पान को मुंह में डालकर धीरे-धीरे चबाते हुए तब तक मंत्र का जाप पुनः किया जाता है, जब तक कि पान पूरी तरह से मुंह में घुल न जाए। उसके बाद थोड़ा पानी पीकर एक अन्य मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। वह मंत्र है—

क्लीं क्रीं हुं क्रों स्फ्रों कामकलाकाली स्फ्रों क्रों क्लीं स्वाहा।।

यह साधना बहुत ही चमत्कारी प्रभाव देती है तथा इसके लिए किसी भी तरह के माला की जरूरत नहीं होती है, लेकिन इसके प्रयोग के समय स्नान के बाद धुले हुए कपड़े पहने जाने चाहिए तथा आसपास के माहौल में शांति होनी चाहिए।