काली मंत्र काली मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ देवी काली पृथ्वी की दिव्य रक्षक हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में कालिका के नाम से जाना जाता है। लेकिन देवी की विनाशकारी शक्ति के कारण उन्हें काली माता के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काली शब्द संस्कृत शब्द काल से आया है, जिसका अर्थ है समय। इसलिए देवी काली समय, परिवर्तन, शक्ति, सृजन, संरक्षण और विनाश का प्रतिनिधित्व करती हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि काली शब्द का अर्थ “काला” है। यह संस्कृत विशेषण काला की स्त्री संज्ञा है। आध्यात्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवी काली को दुर्गा/पार्वती का उग्र रूप और भगवान शिव की पत्नी माना जाता है। काली मां ब्रह्मांड की बुरी शक्तियों का नाश करने वाली होने के साथ-साथ, जो उनकी श्रद्धाभाव से पूजा करता है, उनके अच्छे कर्म के लिए अच्छे फल भी प्रदान करती हैं।
अत: जो व्यक्ति मां काली की अत्यधिक भक्ति के साथ पूजा करते हैं, काली मां उनसे प्रसन्न होती हैं और उन पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखती हैं। साथ ही खूब आशीर्वाद भी देती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काली मां महान देवी की 10 महाविद्याओं या अभिव्यक्तियों में से पहली हैं। मां कली को आमतौर पर नृत्य करते हुए चित्रित किया जाता है या फिर वह अपने पति भगवान शिव के सीने पर एक पैर रखे खड़ी दिखाई जाती हैं। भगवान शिव अपनी पत्नी मां काली के पैर के नीचे शांत चित से लेटे नजर आते हैं। हमारे यहां काली मां की पूजा पूरे देश में की जाती है। नेपाल, श्रीलंका के साथ-साथ हमारे देश के कई हिस्सों में जैसे बंगाल, असम, कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कई भागों में यह पूजा की जाती है। देवी काली ने सदियों से धर्म की रक्षा की और पाप करने वाले को नष्ट करने के लिए कई रूप धारण किए हैं|
मां कालिका हिंदू धर्म में सबसे अधिक जागृत हैं और उन्होंने चार रूपों में पृथ्वी पर विचरण किया है – दक्षिणा काली, श्मशान काली, मां काली और महाकाली। इन सभी रूपों ने विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति की है, रक्षा वध से लेकर पृथ्वी और उसके मूल निवासियों के रक्षा करने तक।
मां काली के विनाशकारी रूप की कहानी
(Story behind the destructive form of Maa Kali in hindi)
दारुक नाम का एक कुख्यात असुर था, जिसने अपनी तपस्या से ब्रह्मा को प्रसन्न किया था। मन चाहा वरदान प्राप्त करने के बाद वह देवताओं सहित ब्रह्मा को भी कष्ट देने लगा। इतना ही नहीं दारुक ने स्वर्ग में भी अपना राज्य स्थापित करना शुरू कर दिया। यह देख देवतागण ब्रह्मा और विष्णु के पास पहुंचे। तब देवतागणों को यह पता चला कि दारुक का वध कोई स्त्री ही कर सकती है। यह सुनकर देवताओं ने एक योजना बनाई। वे महिला रूप धारण कर दारुक से युद्ध करने पहुंचे। लेकिन वास्तव में स्त्री न होने के कारण उनको हार का मुंह देखना पड़ा। देवगण अपने आधिपत्य को खतरे में पाकर अपनी समस्या का निवारण पाने के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं की याचना सुनने के बाद भगवान शिव ने मां पार्वती से बोले, “हे कल्याणी, मैं दुष्ट दारुक को नष्ट करने और दुनिया को बचाने के लिए आपसे निवेदन करता हूं। आप इस समस्या का समाधान निकालें।”
भगवान शिव का अनुरोध सुन माता पार्वती का एक अंश भगवान शिव में प्रवेश कर गया। भगवती माता का वह अंश भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर गया। विष पीने के कारण शिव का कंठ काला है। इसी कारण भगवती माता, देवी काली में परिवर्तित हो गईं। जब भगवान शिव ने खुद में मां काली को महसूस किया, तब उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोली। इसके बाद देवी काली प्रकट हुईं। वह अपने भयंकर रूप में थीं। शिव की तरह ही मां काली की भी माथे पर एक तीसरी आंख और एक चंद्र रेखा थी, कंठ पर विष का चिन्ह था और अपने हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए थीं। मां काली के प्रचंड रूप को देखकर देवता तक घबराकर भागने लगे। मां काली की केवल गुंजन से ही दारुक सहित समस्त असुर सेना जलकर राख हो गई। फिर भी काली की उग्रता समाप्त नहीं हुई। मां काली का क्रोध बढ़ता गया और उन्होंने समूची दुनिया को जलाना शुरू कर दिया।
संसार को क्रोध से बचाने के लिए शिव बालक का रूप धारण कर काली के सामने प्रकट हो गए। जब मां काली ने उस बालक शिरूपी को देखा तो वह उस रूप पर मोहित हो गईं। उन्होंने शिव के बाल रूप को अपने गले से लगाया और उसे अपना स्तनपान कराने लगीं। जल्द ही मां काली का क्रोध शांत हो गया। शिवजी द्वारा स्तनपान करने की वजह से कुछ ही क्षण में मां काली बेहोश हो गईं। मां काली को होश में लाने के लिए शिवजी तांडव करने लगे। जब मां काली होश में आईं, तो उन्होंने शिव को तांडव करते हुए देखा। शिव के साथ-साथ वह भी तांडव करने लगीं। उनके इसी रूप की वजह से उन्हें योगिनी भी कहा जाता है।
देवी काली के दो रूप (Two forms of Goddess Kali)
हिंदू धर्म में, देवी काली को मुख्य तौर पर दो रूपों में चित्रित किया गया है और उसी रूप को पूजा जाता है।
पहला चार भुजाओं वाला रूप है।
दूसरा, दस भुजाओं वाला रूप है, जिसे महा काली के नाम से भी जाना जाता है। इन दोनों रूपों में अलग-अलग अर्थ निहीत हैं। आइए इस संदर्भ में हम विस्तार से जानते हैं।
चार भुजाओं वाला रूप (Four-armed form) भारतीय कला चार भुजाओं वाली काली को काले या नीले रंग में चित्रित करती है। काली की आंखें लाल रंग की हैं, जो क्रोध को दर्शाती हैं। उनके बाल बिखरे हुए दिखाई देते हैं, छोटे-छोटे नुकीले दांत कभी-कभी उनके मुंह से बाहर निकल आते हैं और उनकी जीभ लटकी हुई होती है। मां काली के इंसान के कटे हाथों से बनी वस्त्र धारण करती हैं और गले में खोपड़ी की एक माला पहने होती हैं। मां काली का चतुर्भुज रूप शांत था, उसके चारों हाथों में अलग-अलग वस्तुएं हैं, क्रमश: एक में तलवार, एक में त्रिशूल (त्रिदंत), एक में कटा हुआ सिर और एक में एक में खून से भरी प्याली। जैसा कि अभी-अभी आपने पढ़ा कि मां के एक हाथ में तलवार और एक हाथ में मानव खोपड़ी है। यहां तलवार दिव्य ज्ञान का प्रतीक है और खोपड़ी मानव अहंकार का प्रतीक है, जिसे मोक्ष प्राप्त करने के लिए दिव्य ज्ञान द्वारा मारा जाना चाहिए। मां काली के दाहिने हाथ में अभय (निडरता) और वरदान (आशीर्वाद) मुद्राएं हैं, जिसका अर्थ है कि वह हमेशा अपने भक्तों को सही मार्गदर्शन करेंगी जिससे उनके भक्त भय, अहंकार आदि से बचे रहेंगे। मां काली अपने गले में खोपड़ी की माला धारण करती हैं, जिसकी गणना 108 या 51 में की जाती है, यही वजह है कि उन्हें ज्योतिष में सभी मंत्रों की मां के रूप में जाना जाता है।
दस भुजाओं वाला रूप (The ten-armed form) मां काली का दस भुजाओं वाला महाकाली का रूप है। अपने महाकाली रूप में उन्हें नीले पत्थर की तरह चमकते हुए दिखाया गया है। महाकाली दस भुजाओं वाले रूप में दस मुख, दस पैर और उनके प्रत्येक मुख पर तीन आंखें हैं। उनके प्रत्येक हाथ में विभिन्न वस्तु है, जो देवताओं की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इस शक्ति को महा काली के हथियारों के रूप में दर्शाया गया है। निहितार्थ यह है कि महाकाली उन शक्तियों के लिए जिम्मेदार हैं, जो इन देवताओं के पास हैं। इसका अर्थ यह है कि महाकाली ब्रह्म के समान हैं।
कभी-कभी लोग “एक मुखी” या दस भुजाओं वाली महाकाली की एक सिर वाली मूर्ति की पूजा करते हैं, जो उसी अवधारणा को दर्शाती है। काली के शक्ति उपकरण कुंडलिनी शक्ति (आध्यात्मिक शक्ति) है। इसमें क्रिया शक्ति मौजूद है, जो ब्रह्मांड को रचनात्मक रूप से प्रभावित करने की शक्ति है। इसके अलावा इच्छा शक्ति, जो व्यक्तिगत रूप से हमारे शारीरिक गति और कार्यों को करने के लिए बाध्य करती है। जबकि ब्रह्मांड में यह आकाशगंगाओं को एक दूसरे से ब्रह्मांडीय रात में ले जाने का कारण बनती है। विभिन्न मंत्रों के जाप से जातक को इन ऊर्जाओं को अपने लिए प्राप्त करने में मदद मिलती है।
काली मंत्र का जाप कैसे करें (How to chant the Kali mantras in hindi) महाकाली यंत्र माला लेकर ही मंत्र जाप शुरु करें|
देवी काली, काले रंग का प्रतिनिधित्व करती हैं और इसलिए अंधेरा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करता है। काली मंत्र का जाप करने से पहले कुछ नियमों का आवश्यक रूप से पालन करना चाहिए। जानिए कौन से हैं वे नियम- काली मंत्र (Kali mantras) का जाप सुबह के समय किया जा सकता है। लेकिन सूर्यास्त के कुछ घंटे बाद इन मंत्रों का जाप करना अधिक लाभकारी है।
काली मंत्र (Kali mantras) का जाप अमावस्या के दिन किया जाना ज्यादा लाभकारी होता है। मां काली मंत्र जाप या पूजा के दौरान लाल रंग के वस्त्र पहनें क्योंकि मां काली को यह रंग पसंद है। मां काली की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े के ऊपर रखकर मंत्र जाप करें। मंत्रों का जाप करते समय मां काली के लाल फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं। काली मंत्र का जाप करते समय हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। इस मंत्र के नियमित जप से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। मंत्र के उच्चारण से जो कंपन उत्पन्न होता है, वह आपको अपने अस्तित्व के शक्ति का अहसास कराता है। किसी भी काली मंत्र का जाप कम से कम 40 दिनों तक निरंतर करें। इससे आपको मनचाहा फल प्राप्त होगा। अगर आप काली मंत्र का जाप कर रहे हैं, तो मांसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन से परहेज करें। महत्वपूर्ण काली मंत्र का मंत्र सिद्ध यंत्र माला लेकर ही करना चाहिए|
1. काली बीज मंत्र (Kali Beej Mantra) काली बीज मंत्र देवी काली से संबंधित है। जैसे बीज मंत्र का कोई विशिष्ट अर्थ नहीं है। लेकिन यह उन स्पंदनों का प्रतिनिधित्व करता है जो मन की आध्यात्मिक और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। काली बीज मंत्र का जाप जातक को देवी काली की ऊर्जा से जोड़ता है। ये परिवर्तनकारी ऊर्जाएं जातक को उसके आसपास और अंदरूनी बुरी ताकतों से लड़ने में मदद करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि काली बीज मंत्र को भक्तिभाव से जप करने से जातक को मनपसंद चीजें प्राप्त होती हैं। वे चीजें भौतिक भी हो सकती हैं।
काली बीज मंत्र है:
|| ॐ क्रीं काली || अर्थ- यहां ‘क’ का अर्थ पूर्ण ज्ञान है, ‘र’ का अर्थ शुभ है और ‘बिंदु’ का अर्थ वह स्वंत्रता देती है। वह अपने भक्त को पूर्ण ज्ञान देती है और उसके जीवन को शुभ घटनाओं से भर देती है। उस सर्वोपरि देवी को मेरा नमन।
काली बीज मंत्र के जाप के लाभ (Benefits of chanting the Kali Beej mantra in hindi) ज्योतिषियों के अनुसार काली बीज मंत्र का जाप सभी बुरी शक्तियों से बचाता है। काली बीज मंत्र का भक्ति भाव के साथ जप करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आपके आसपास के माहौल में सकारात्मकता का संचार होता है। जातक अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए भी इस मंत्र का जाप कर सकता है। काली बीज मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए हर रोज 108 बार काली बीज मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर
2. काली मंत्र (Kali Mantra) भले ही देवी काली भयावह दिखती हैं, लेकिन वह हमेशा अपने भक्तों की प्रार्थनाएं सुनती हैं। वह अपने भक्तों से बहुत प्यार करती हैं। यदि भक्त देवी काली से प्रार्थना करते समय काली मंत्र का जाप करते हैं, तो उनकी हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। कहा जाता है कि नीचे वर्णित काली मंत्र जातक की चिंताओं को दूर करता है और भगवान के करीब लाने में मदद करता है। काली मंत्र सरल है और भक्त को जीवन में बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है। इससे जातक की चेतना शुद्ध होती है। काली मंत्र है: || ॐ क्रीं कालिकायै नमः || अर्थ – काली मां के इस मंत्र का उपयोग काली माता के प्रतिनिधित्व के लिए किया जाता है। यह मंत्र काफी सरल है और इसके उच्चारण से चेतना शुद्ध होती है।
काली मंत्र जाप के लाभ (Benefits of chanting the Kali mantra in hindi) जैसा कि ऊपर बताया गया है, काली मंत्र भक्त की चेतना को शुद्ध करने में मदद करता है। इसका मायने यह है कि यह मंत्र जातक के मन से अव्यवस्था को दूर करने में मदद करता है। इस काली मंत्र के जाप से जातक को अत्यधिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह मंत्र सभी प्रकार के भावनात्मक दर्द को दूर करता है। यदि आपको अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है, तो यह मंत्र आपके लिए बहुत उपयोगी है। यह मंत्र जातक को साहसी बनाता है। काली मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए हर रोज 108 बार काली मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर 3. महा काली मंत्र (Maha Kali mantra) महा काली का रूप डरावना है लेकिन वह अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। जो इस मंत्र का सही तरीके से और पूरे श्रद्धाभाव से उच्चारण करता है, उसमें साहस का संचार होता है। इससे भक्त को इस मंत्र के जाप की प्रेरणा भी मिलती है। महा काली महान दिव्य रूप हैं। इनके आशीर्वाद से जातक अपने आसपास की नकारात्म्क चीजों को बदलने की शक्ति प्राप्त करता है। यदि आप नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करते हैं, तो आप अपने चारों ओर सकारात्मक कंपन को महसूस करेंगे, जो आपको अपनी बेहतरी के लिए प्रेरित करेंगे।
महा काली मंत्र है: || ॐ श्री महा कलिकायै नमः || अर्थ – मैं दिव्य मां काली के समक्ष अपना सिर झुकाता हूं। देवी मां काली को मैं नमन करता हूं। महाकाली मंत्र के जाप के लाभ (Benefits of chanting the Maha Kali mantra in hindi) मां काली को प्रसन्न करने के लिए आपको महाकाली मंत्र का जाप करना चाहिए। महा काली मंत्र एक कवच है, जो जातकों को संकटों से उसकी रक्षा करता है। महा काली मंत्र का जाप करने से जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही जातक को यह तय करने में मदद मिलती है कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। महा काली मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए हर रोज 1008 बार महा काली मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर
4. कालिका-यी मंत्र (Kalika-Yei Mantra) हमारे जीवन में कुछ समस्याएं बहुत जटिल होती हैं। जटिल समस्याएं हमें बेहद परेशान करती हैं। ये परेशानियां हमें जीवन का आनंद लेने नहीं देतीं और न ही खुलकर जीने देती हैं। ऐसी परेशािनयों से निपटने के लिए कालिका-यी मंत्र है। यह मंत्र उन छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिनकी जिंदगी संघर्षों से भरी हुई है, हर क्षण तनाव में रहते हैं, निजी या व्यवसायिक जीवन में खुद को असफल पाते हैं। यही नहीं अपने लिए बेहतर योजना बनाने में भी खुद को विफल पाते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए कालिका-यी मंत्र आपकी मदद कर सकता है। यह मंत्र बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान खोजने में मदद करता है।
कालिका-यी मंत्र है: || ॐ कलिं कालिका-य़ेइ नमः || अर्थ -देवी काली की जय हो। आप हमें अधिक सचेत और व्यावहारिक होने का आशीर्वाद दो। आप हमें बुद्धिमान बनाओ।
कालिका-यी मंत्र के जाप के लाभ (Benefits of chanting the Kalika-Yei mantra in hindi) जैसा कि ऊपर बताया गया है, कालिका-यी मंत्र को सभी प्रकार की समस्याओं से राहत दिलाने वाला माना जाता है, चाहे वह कितना भी जटिल क्यों न हो। यह मंत्र खासकर छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए उपयोगी है। इस मंत्र के उच्चारण जीवन बेहतर होता है। यह मंत्र जीवन की रक्षा करता है। यह आपको बुरी नजर से और उसके खतरों से बचाता है। इस प्रकार आप निरंतर प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। कालिका-यी मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए हर रोज 108 बार कालिका-यी मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर 5. काली गायत्री मंत्र (Kali Gayatri Mantra) यदि आप जीवन में शीघ्र सफल होना चाहते हैं तो काली गायत्री मंत्र सबसे उपयोगी मंत्रों में से एक है। अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहे जातकों को काली गायत्री मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए। इस मंत्र के कंपन से जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा जातक को सफलता, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
काली गायत्री मंत्र है: || ॐ कालिकायै च विद्महे, श्मशानवासिन्यै धीमहि, तन्नो काली प्रचोदयात् ||
अर्थ -ओ महान काली देवी, मां काली, जो जीवन के महासागर में और दुनिया को भंग करने वाले श्मशान घाट में निवास करने वाली, हम अपनी ऊर्जा आप पर केंद्रित करते हैं, आप हमें आशीर्वाद दो।’ काली गायत्री मंत्र के जाप के लाभ (Benefits of chanting the Kali Gayatri mantra in hindi) काली गायत्री मंत्र का जाप करते ही जातक का मन दैवीय रूप से रूपांतरित हो जाता है और मां काली के आशीर्वाद से उसकी सभी सांसारिक समस्याओं का निदान हो जाता है। काली गायत्री मंत्र जातक को उसके निजी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करता है। यह मंत्र जातक का भयमुक्त बनाता है या भय से निपटने के लिए उचित कदम उठाने में भी मदद करता है। काली गायत्री मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए प्रतिदिन 9 बार काली गायत्री मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर 6. दक्षिणा काली ध्यान मंत्र (Dakshina Kali Dhyan Mantra) ध्यान मन की एक अवस्था है, जो आपको परमात्मा से जुड़ने में मदद करती है। इस मंत्र को कर्पुरदी स्तोत्र भी कहा जाता है। ध्यान मंत्र के नियमित जाप से जातक मां काली की विभिन्न ऊर्जाओं से जुड़ सकता है। हालांकि, इस मंत्र का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए नियमित तौर पर दक्षिणा काली ध्यान मंत्र का जाप करना चाहिए।
दक्षिणा काली ध्यान मंत्र है: || ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं ||
अर्थ – धरती को पालने वाली और ब्रह्मांड को हर तरह के संकटों से बचाने वाली देवी मां को नमन।
दक्षिणा काली ध्यान मंत्र के जाप के लाभ (Benefits of chanting Dakshina Kali Dhyan mantra in hindi) इस मंत्र का जाप आपको ढोंग और सब तरह के बंधन जाल से मुक्त करता है। दक्षिणा काली ध्यान मंत्र आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है, जिससे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाते हैं और सभी कठिनाओं से मुक्ति पा लेते हैं। दक्षिणा काली ध्यान मंत्र के जाप से जातक को शांति, सुख और संतुष्टि मिलती है। दक्षिणा काली ध्यान मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात इस मंत्र का जाप करने की संख्या 40 दिनों के लिए प्रतिदिन 9 बार दक्षिणा काली ध्यान मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी किस ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें पूर्व या उत्तर दिशा
7. काली मंत्र (Kali Chants) उपरोक्त काली मंत्रों के अलावा कुछ अन्य काली मंत्र भी हैं, जिनका जाप देवी काली का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं।
ॐ काली, काली! ॐ काली, काली! नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमो! नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमो || आनंद मां आनंद मां काली आनंद मां आनंद मां काली आनंद मां आनंद मां काली ॐ काली माँ ||
काली मंत्र जाप के समग्र लाभ (Overall benefits of Chanting the Kali mantras in hindi)
काली मंत्र सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। समस्याओं से बचने के लिए आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। काली मंत्र का जाप उन कंपन से गूंजता है, जो आपको शांत करते हैं अर्थात शांत मन प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का उपयोग कर सकते हैं। काली मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की आंतरिक चेतना जागृत होती है और जीवन में स्थिरता लाता है। काली मंत्र का जाप करने से आपको अपने परिवार और प्रियजनों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि आप नियमित रूप से भक्तिभाव के साथ काली मंत्र का जाप करते हैं, तो देवी आपके सभी कष्टों का अंत कर देंगी। नियमित रूप से मंत्र का जाप करने से जातक को उन आपदाओं से बचाता है, जो स्वास्थ्य, धन और सुख को प्रदान कर सकती हैं। काली मंत्र के नियमित जाप से आपको शक्ति मिलती है, जिससे आप अपने सामने आने वाली समस्याओं से सहजता से निपट सकते हैं। मां काली मंत्र का जाप आपके जीवन को उज्ज्वल करता है। यदि आप नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करते हैं तो आपको अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होगा। यह मंत्र जातक की आर्थिक स्थिति सुधारता है और ऋणों से मुक्ति दिलाता है। काली मंत्र का जाप आपके प्रेम जीवन से जुड़ी समस्याओं को भी हल करने में मदद करता है। यह मंत्र सफलता, खुशी, प्रगति और कल्याण प्रदान करता है। मंत्र का जाप और इससे निकलने वाले कंपन आपके स्वास्थ्य को अच्छा करने में मदद करते हैं। काली मंत्र बुरी नजर से बचाता है और उन बाधाओं को दूर करता है, जो आपको सफल होने से रोकती हैं। इस मंत्र की मदद से आप अपने लिए सही साथी की तलाश कर सकते हैं। साथ ही काली मंत्र का जाप करने से विवाह में आई समस्याओं का समाधान खोजने में भी मदद मिलती है। काली मंत्र के जाप से जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही ये मंत्र आपको सही निर्णय लेने में भी मदद करते हैं। आपके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है, आप यह समझने में भी सक्षम हो जाते हैं।
🌹काली माता के चमत्कारी मंत्र, दुर्गाजी का एक रुप कालीजी है। यह देवी विशेष रुप से शत्रुसंहार, विघ्ननिवारण, संकटनाश और सुरक्षा की अधीश्वरी है।महाकाली भगवती कालिका अर्थात काली के अनेक स्वरुप, अनेक मन्त्र तथा अनेक उपासना विधियां है। यथा-श्यामा, दक्षिणा कालिका (दक्षिण काली) गुह्म काली, भद्रकाली, महाकाली आदि ।
दशमहाविद्यान्तर्गत भगवती दक्षिणा काली
(दक्षिणकालीका) की उपासना की जाती है।इनकी उपासना सुरक्षा, शौर्य, पराक्रम, युद्ध, विवाद और प्रभाव विस्तर के संदर्भ में की जाती है। कालीजी की रुपरेखा भयानक है। देखकर सहसा रोमांच होआता है। पर वह उनका दुष्टदलन रुप है।
काली के अनेक भेद हैं –
पुरश्चर्यार्णवेः-
१-दक्षिणाकाली
२॰ भद्रकाली
३॰श्मशानकाली
४॰ कामकलाकाली
५॰ गुह्यकाली
६॰ कामकलाकाली
७॰ धनकाली
८॰सिद्धिकाली
९॰ चण्डीकाली।
जयद्रथयामलेः-
१॰ डम्बरकाली
२॰ गह्नेश्वरी काली
३॰एकतारा
४॰ चण्डशाबरी
५॰ वज्रवती
६॰ रक्षाकाली
७॰ इन्दीवरीकाली
८॰धनदा
९॰ रमण्या
१०॰ ईशानकाली
११॰ मन्त्रमाता ।
सम्मोहने तंत्रेः-
‘१॰ स्पर्शकाली
२॰ चिन्तामणि
३॰ सिद्धकाली
४॰ विज्ञाराज्ञी
५॰ कामकला
६॰ हंसकाली
७॰ गुह्यकाली ।
तंत्रान्तरेऽपिः-
१॰ चिंतामणि काली
२॰ स्पर्शकाली
३॰ सन्तति-प्रदा-काली
४॰ दक्षिणा काली
६॰ कामकला काली
७॰ हंसकाली
८॰ गुह्यकाली ।
काली की गुप्त शक्ति
Maha kali shakti
1 – kerkasni ( kam krodh nasht)
2- shushakkanta (Heart atma )
3- samaye trasani ( samaye dosh ko theek karti hai)
4-Guhevedni (purv janam ke dosh katati hai
काली की गुप्त शक्ति
Kerkesni
शुष्क कांता
समय त्रासनी
गुवेदनी दक्षिण कालिका के मन्त्र :-
भगवती दक्षिण कालिका के अनेक मन्त्र है, जिसमें से कुछ इस प्रकार है।
श्मशान साधना मे काली उपासना
(1) क्रीं,
(2) ॐ ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं।
(3) ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
(4) नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा।
(5) नमः आं क्रां आं क्रों फट स्वाहा कालि कालिके हूं।
(6) क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हुं हुं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रींह्रीं ह्रीं हुं हुं स्वाहा।
इनमें से किसी भी मन्त्र का जप मंत्र सिद्ध यँत्र ले कर किया जा सकता है।
पूजा -विधि :-
दैनिक कृत्य स्नान-प्राणायम आदि से निवृत हो कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर, सामान्य पूजा-विधि से काली- यन्त्र का स्थपना कर के पूजन करें।
तत्पश्चात ॠष्यादि- न्यास एंव करागन्यास करके भगवती का इस प्रकार ध्यान करें-
शवारुढां महाभीमां घोरदृंष्ट्रां वरप्रदाम्।हास्य युक्तां त्रिनेत्रां च कपाल कर्तृकाकराम्।
मुक्त केशी ललजिह्वां पिबंती रुधिरं मुहु:। चतुर्बाहूयुतां देवीं वराभयकरां स्मरेत्॥”
इसके उपरान्त मूल-मन्त्र द्वारा व्यापक-न्यास करके यथा विधि मुद्रा-प्रदर्शन पूर्वक पुनः ध्यान करना चाहिए।
पुरश्चरण : –
कालिका मन्त्र के पुरश्चरण में दो लाख की संख्या में मन्त्र-जप किया है।
कुछ मन्त्र केवल एक लाख की संख्या में भी जपे जाते है। जप का दशांश होमघृत द्वारा करना चाहिए ।
होम का दशांश तर्पण, तर्प्ण का दशांश अभिषेक तथाअभिषेक का दशांश ब्राह्मण – भोजन कराने का नियम है।
विधि –
लाल आसन पर कालीजी की प्रतिमा अथवा चित्र या यन्त्र स्थापित करके, लालचन्दन, पुष्प तथा धूपदीप से पूजा करके मन्त्र जप करना चाहिए। नियमत रुप से श्रद्धापूर्वक आराधना करने वालि जनों को कालीजी
(प्रायः सभी शक्ति स्वरुप) स्वप्न मे दर्शन देती है।
ऐसे दर्शन से घबङाना नहीं चाहिए और उस स्वप्न की कहीं चर्चा भी नही चाहिए। कालीजी की पुजा में बली का विधान भी है। किन्त सात्विक उपासना की दृष्टि से बलि के नाम पर नारियल अथवा किसी फल का प्रयोग किया जा सकता है।
ध्यान स्तुति-
खडगं गदेषु चाप परिघां शूलम भुशुंडी शिरः
शंखं संदधतीं करैस्तिनयनां सर्वाग भूषावृताम्।
नीलाश्मद्युतिमास्य पाद द्शकां सेवै महाकालिकाम्।
यामस्तौत्स्वपितो हरौ कमलजो हन्तुं मधु कैटभम्॥
जप मन्त्र-
ॐ क्रां क्रीं क्रूं कालिकाय नमः।
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै ससतं नमः।नमः प्रकृत्यै भद्रायै निततां प्रणतां स्मताम्॥
श्री महाकाली यन्त्र
श्मशान साधना मे काली उपासना का बङा महत्व है। इसी सन्दर्भ मे महाकालीयन्त्र का प्रयोग शत्रु नाश, मोहन, मारण, उच्चाट्न आदि कार्यों मेंप्रयुक्त होता है। मध्य मे बिन्दू, पांच उल्ट कोण, तीन वृत कोण, अष्टदल वृतएवं भूरपुर से आवृत महाकाली का यन्त्र तैयार करे।
इस यन्त्र का पूजन करते समय शव पर आरुढ, मुण्ड्माला धारण की हुई, खड्ग, त्रिशूल, खप्पर व एक हाथ मे नर-मुण्ड धारण की हुई, रक्त जिह्वा लपलपाती हुईभयंकर स्वरुप वाली महाकाली का ध्यान किया जाता है। जब अन्य विद्यायें विफलहो जाती है तब इस यन्त्र का सहारा लिया जाता है।चैत्र, आषाढ, आश्विन एवं माघ की अष्टमी इसकी साधना हेतु सर्वश्रेष्ठ काल माना गया है।
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र
श्री दुर्गा सप्तसती में वर्णित अत्यंत प्रभावशली इस सिद्ध कुन्जिका स्त्रोत्र का नित्य पाठ करने से संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशती पाठका फल मिलता है .यह महामंत्र देवताओं को भी दुर्लभ है , इस मंत्र का नित्यपाठ करने से माँ भगवती जगदम्बा की कृपा बनी रहती है ..
अथ सिद्ध कुन्जिका स्तोत्र
शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत्॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥2॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥ 3॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥4॥
अथ मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
॥ इति मंत्रः॥
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन ॥1॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥2॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥3॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥ 4॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥5॥
धां धीं धू धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥6॥
हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥7॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥ 8॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे॥
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
। इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वतीसंवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्|
महाकाली
त्रिलोक्य विजयस्थ कवचस्य शिव ऋषि ,
अनुष्टुप छन्दः, आद्य काली देवता,
माया बीजं,रमा कीलकम , काम्य सिद्धि विनियोगः || १ ||
ह्रीं आद्य मे शिरः पातु श्रीं काली वदन ममं,
हृदयं क्रीं परा शक्तिः पायात कंठं परात्परा ||२||
नेत्रौ पातु जगद्धात्री करनौ रक्षतु शंकरी,
घ्रान्नम पातु महा माया रसानां सर्व मंगला ||३||
दन्तान रक्षतु कौमारी कपोलो कमलालया,
औष्ठांधारौं शामा रक्षेत चिबुकं चारु हासिनि ||४|
ग्रीवां पायात क्लेशानी ककुत पातु कृपा मयी,
द्वौ बाहूबाहुदा रक्षेत करौ कैवल्य दायिनी ||५||
स्कन्धौ कपर्दिनी पातु पृष्ठं त्रिलोक्य तारिनी,
पार्श्वे पायादपर्न्ना मे कोटिम मे कम्त्थासना ||६||
नभौ पातु विशालाक्षी प्रजा स्थानं प्रभावती,
उरू रक्षतु कल्यांनी पादौ मे पातु पार्वती ||७||
जयदुर्गे-वतु प्राणान सर्वागम सर्व सिद्धिना,
रक्षा हीनां तू यत स्थानं वर्जितं कवचेन च ||८||
इति ते कथितं दिव्य त्रिलोक्य विजयाभिधम,
कवचम कालिका देव्या आद्यायाह परमादभुतम ||९||
पूजा काले पठेद यस्तु आद्याधिकृत मानसः,
सर्वान कामानवाप्नोती तस्याद्या सुप्रसीदती ||१०||
मंत्र सिद्धिर्वा-वेदाषु किकराह शुद्रसिद्धयः,
अपुत्रो लभते पुत्र धनार्थी प्राप्नुयाद धनं ||११|
विद्यार्थी लभते विद्याम कामो कामान्वाप्नुयात
सह्स्त्रावृति पाठेन वर्मन्नोस्य पुरस्क्रिया ||१२||
पुरुश्चरन्न सम्पन्नम यथोक्त फलदं भवेत्,
चंदनागरू कस्तूरी कुम्कुमै रक्त चंदनै ||१३||
भूर्जे विलिख्य गुटिका स्वर्नस्याम धार्येद यदि,
शिखायां दक्षिणे बाह़ो कंठे वा साधकः कटी ||१४||
तस्याद्या कालिका वश्या वांछितार्थ प्रयछती,
न कुत्रापि भायं तस्य सर्वत्र विजयी कविः ||१५||
अरोगी चिर जीवी स्यात बलवान धारण शाम,
सर्वविद्यासु निपुण सर्व शास्त्रार्थ तत्त्व वित् ||१६||
वशे तस्य माहि पाला भोग मोक्षै कर स्थितो,
कलि कल्मष युक्तानां निःश्रेयस कर परम ||१७||
।। श्री श्री काली सहस्त्राक्षरी ।।
ॐ क्रीं क्रीँ क्रीँ ह्रीँ ह्रीँ हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीँ क्रीँ क्रीँ ह्रीँ ह्रीँ हूं हूं स्वाहा शुचिजाया महापिशाचिनी दुष्टचित्तनिवारिणी क्रीँ कामेश्वरी वीँ हं वाराहिके ह्रीँ महामाये खं खः क्रोघाघिपे श्रीमहालक्ष्यै सर्वहृदय रञ्जनी वाग्वादिनीविधे त्रिपुरे हंस्त्रिँ हसकहलह्रीँ हस्त्रैँ ॐ ह्रीँ क्लीँ मे स्वाहा ॐ ॐ ह्रीँ ईं स्वाहा दक्षिण कालिके क्रीँ हूं ह्रीँ स्वाहा खड्गमुण्डधरे कुरुकुल्ले तारे
ॐ. ह्रीँ नमः भयोन्मादिनी भयं मम हन हन पच पच मथ मथ फ्रेँ विमोहिनी सर्वदुष्टान् मोहय मोहय हयग्रीवे सिँहवाहिनी सिँहस्थे अश्वारुढे अश्वमुरिप विद्राविणी विद्रावय मम शत्रून मां हिँसितुमुघतास्तान् ग्रस ग्रस महानीले वलाकिनी नीलपताके क्रेँ क्रीँ क्रेँ कामे संक्षोभिणी उच्छिष्टचाण्डालिके सर्वजगव्दशमानय वशमानय मातग्ङिनी उच्छिष्टचाण्डालिनी मातग्ङिनी सर्वशंकरी नमः स्वाहा विस्फारिणी कपालधरे घोरे घोरनादिनी भूर शत्रून् विनाशिनी उन्मादिनी रोँ रोँ रोँ रीँ ह्रीँ श्रीँ हसौः सौँ वद वद क्लीँ क्लीँ क्लीँ क्रीँ क्रीँ क्रीँ कति कति स्वाहा काहि काहि कालिके शम्वरघातिनी कामेश्वरी कामिके ह्रं ह्रं क्रीँ स्वाहा हृदयाहये ॐ ह्रीँ क्रीँ मे स्वाहा ठः ठः ठः क्रीँ ह्रं ह्रीँ चामुण्डे हृदयजनाभि असूनवग्रस ग्रस दुष्टजनान् अमून शंखिनी क्षतजचर्चितस्तने
उन्नस्तने विष्टंभकारिणि विघाधिके श्मशानवासिनी कलय कलय विकलय विकलय कालग्राहिके सिँहे दक्षिणकालिके अनिरुद्दये ब्रूहि ब्रूहि जगच्चित्रिरे चमत्कारिणी हं कालिके करालिके घोरे कह कह तडागे तोये गहने कानने शत्रुपक्षे शरीरे मर्दिनि पाहि पाहि अम्बिके तुभ्यं कल विकलायै बलप्रमथनायै योगमार्ग गच्छ गच्छ निदर्शिके देहिनि दर्शनं देहि देहि मर्दिनि महिषमर्दिन्यै स्वाहा रिपुन्दर्शने दर्शय दर्शय सिँहपूरप्रवेशिनि वीरकारिणि क्रीँ क्रीँ क्रीँ हूं हूं ह्रीँ ह्रीँ फट् स्वाहा शक्तिरुपायै रोँ वा गणपायै रोँ रोँ रोँ व्यामोहिनि यन्त्रनिकेमहाकायायै
प्रकटवदनायै लोलजिह्वायै मुण्डमालिनि महाकालरसिकायै नमो नमः ब्रम्हरन्ध्रमेदिन्यै नमो नमः शत्रुविग्रहकलहान् त्रिपुरभोगिन्यै विषज्वालामालिनी तन्त्रनिके मेधप्रभे शवावतंसे हंसिके कालि कपालिनि कुल्ले कुरुकुल्ले चैतन्यप्रभेप्रज्ञे
तु साम्राज्ञि ज्ञान ह्रीँ ह्रीँ रक्ष रक्ष ज्वाला प्रचण्ड चण्डिकेयं शक्तिमार्तण्डभैरवि विप्रचित्तिके विरोधिनि आकर्णय आकर्णय पिशिते पिशितप्रिये नमो नमः खः खः खः मर्दय मर्दय शत्रून् ठः ठः ठः कालिकायै नमो नमः ब्राम्हयै नमो नमः माहेश्वर्यै नमो नमः कौमार्यै नमो नमः वैष्णव्यै नमो नमः वाराह्यै नमो नमः इन्द्राण्यै नमो नमः चामुण्डायै नमो नमः अपराजितायै नमो नमः नारसिँहिकायै नमो नमः कालि महाकालिके अनिरुध्दके सरस्वति फट् स्वाहा पाहि पाहि ललाटं भल्लाटनी अस्त्रीकले जीववहे वाचं रक्ष रक्ष परविधा क्षोभय क्षोभय आकृष्य आकृष्य कट कट महामोहिनिके चीरसिध्दके कृष्णरुपिणी अंजनसिद्धके स्तम्भिनि मोहिनि मोक्षमार्गानि दर्शय दर्शय स्वाहा ।।
इस काली सहस्त्राक्षरी का नित्य पाठ करने से ऐश्वर्य,मोक्ष,सुख,समृद्धि,एवं शत्रुविजय प्राप्त होता है ।।
1-काली
दस महाविद्याओंमें काली प्रथम हैं। महाभागवतके अनुसार महाकाली ही मुख्य
हैं और उन्हीं के उग्र और सौम्य दो रूपोंमें अनेक रूप धारण करनेवाली दस
महाविद्याएं हैं। विद्यापति भगवान् शिवकी शक्तियाँ ये महाविद्याएँ हैं।
विद्यापति भगवान, शिव की शक्तियाँ ये महाविद्याएँ अनन्त सिद्धियाँ प्रदान
करने में समर्थ हैं। दार्शनिक दृष्टिसे भी कालतत्तवकी प्रधानता सर्वोपरि
है। इसलिये महाकाली या काली ही समस्त विद्याओं की आदि हैं। अर्थात् उनकी
विद्यामय विभूतियाँ ही महाविद्याएं हैं। ऐसा लगता है कि महाकालकी
प्रियतमा काली ही अपने दक्षिण और वाम रूपों में दस महा विद्याओं के नामसे
विख्यात हुईं। बृहन्नीलतन्त्रम ें कहा गया है कि रक्त और कृष्णभेदसे काली
ही दो रूपों में अधिष्ठित हैं। कृष्णाका नाम ‘दक्षिणा’ और रक्तवर्णाका
नाम ‘सुन्दरी’ है।
कालिकापुराण में कथा आती है कि एक बार हिमालयपर अवस्थित मतंग मुनिके
आश्रम में जाकर देवताओं ने महामायाकी स्तुति की। स्तुति से प्रसन्न होकर
मतंग-वनिताके रूप में भगवतीने देवताओं को दर्शन दिया और पूछा कि तुमलोग
किसकी स्तुति कर रहे हो। उसी समय देवीके शरीर से काले पहाड़ के समान
वर्णवाली एक और दिव्य नारीका प्राकट्य हुआ। उस महातेजस्विनी ने स्वयं ही
देवताओं की ओर से उत्तर दिया कि ‘ये लोग मेरा ही स्तवन कर रहे हैं।’ वे
काजलके समान कृष्णा थीं, इसलिये उनका नाम ‘काली’ पड़ा।
दुर्गा सप्तशीतीके अनुसार एक बार शुम्भ-निशुम्भ के अत्याचार से व्यथित
होकर देवताओं ने हिमालय जाकर देवीसूक्त से देवीकी स्तुति की, तब गौरीकी
देहसे कौशिकीका प्राकट्य हुआ। कौशिकी के अलग होते ही अम्बा पार्वतीका
स्वरूप कृष्णा हो गया, जो ‘काली’ नाम से विख्यात हुईं। कालीको नीलरूपा
होने के कारण तारा भी कहते हैं। नारद-पाञ्चरात्र के अनुसार एक बार कालीके
मन में आया कि वे पुनः गौरी हो जायँ। यह सोचकर वे अन्तर्धान हो गयीं।
शिवजीने नारदजी से उनका पता पूछा। नारदजी ने उनसे सुमेरुके उत्तर में
देवी के प्रत्यक्ष उपस्थित होने की बात कही। शिवजीकी प्रेरणासे नारद वहां
गये। उन्होंने देवीसे शिवजी के साथ विवाहका प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव सुनकर
देवी कुद्ध हो गयीं और उनकी देहसे एक अन्य षोडशी विग्रह प्रकट हुआ और
उससे छाया विग्रह त्रिपुरभैरवीका प्राकट्य हुआ।
काली की उपासना में सम्प्रदायगत भेद हैं। प्रायः दो रूपों में इनकी
उपासना का प्रचलन हैं। भव-बन्धन, मोचनमें उपासना सर्वोत्कृष्ट कही जाती
है। शक्ति –साधना के दो पीठों में कालीकी उपासना श्याम-पीठा पर करनेयोग्य
हैं। भक्तिमार्ग में तो किसी भी रूप में उन महामाया की उपासना फलप्रदा
है, पर सिद्धके लिये उनकी उपासना वीरभाव से की जाती है। साधना के द्वारा
जब अहंता, ममता और भेद-बुद्धिका नाश होकर साधन में पूर्ण शिशुत्व का उदय
हो जाता है, तब कालीका श्रीविग्रह साधकके समक्ष प्रकट हो जाता है। उस समय
भगवती कालीकी छवि अवर्णनीय होती है। कज्जलके पहाड़ के, समान, दिग्वसना,
मुक्तकुन्तला, शवपर आरुढ़, मुण्डमालाधारिणी भगवती कालीका प्रत्यक्ष दर्शन
साधकको कृतार्थ कर देता है। तान्त्रिक-मार्ग में यद्यपि कालीकी उपासना
दीक्षागस्य हैं, तथापि अनन्य शरणागति के द्वारा उनकी कृपा किसी को भी
प्राप्त हो सकती है। मूर्ति, मन्त्र अथवा गुरुद्वारा उपदिष्ट किसी भी
आधारपर भक्तिभावसे, मन्त्र-जप, पूजा, होम और पुरश्र्चरण करने से भगवती
काली प्रसन्न हो जाती हैं। उनकी प्रसन्नतासे साधकको सहज ही सम्पूर्ण
अभीष्टों की प्राप्ति हो जाती है।
भगवती कालिका अर्थात काली के अनेक स्वरुप, अनेक मन्त्र तथा अनेक उपासना विधियां है। यथा-श्यामा, दक्षिणा कालिका (दक्षिण काली) गुह्म काली, भद्रकाली, महाकाली आदि । दशमहाविद्यान्तर्गत भगवती दक्षिणा काली (दक्षिण कालीका) की उपासना की जाती है।
दक्षिण कालिका के मन्त्र :- भगवती दक्षिण कालिका के अनेक मन्त्र है, जिसमें से कुछ इस प्रकार है।
(1) क्रीं,
(2) ॐ ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं।
(3) ह्रीं ह्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं हुं हुं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
(4) नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा।
(5) नमः आं क्रां आं क्रों फट स्वाहा कालि कालिके हूं।
(6) क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हुं हुं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हुं हुं स्वाहा। इनमें से कीसी भी मन्त्र का जप किया जा सकता है।
पूजा -विधि :- दैनिक कृत्य स्नान-प्राणायम आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर, सामान्य पूजा-विधि से काली- यन्त्र का पूजन करें। तत्पश्चात ॠष्यादि- न्यास एंव करागन्यास करके भगवती का इस प्रकार ध्यान करें-
शवारुढां महाभीमां घोरदृंष्ट्रां वरप्रदाम्।
हास्य युक्तां त्रिनेत्रां च कपाल कर्तृकाकराम्।
मुक्त केशी ललजिह्वां पिबंती रुधिरं मुहु:।
चतुर्बाहूयुतां देवीं वराभयकरां स्मरेत्॥”
इसके उपरान्त मूल-मन्त्र द्वारा व्यापक-न्यास करके यथा विधि मुद्रा-प्रदर्शन पूर्वक पुनः ध्यान करना चाहिए।
पुरश्चरण : – कालिका मन्त्र के पुरश्चरण में दो लाख की संख्या में मन्त्र-जप किया है। कुछ मन्त्र केवल एक लाख की संख्या में भी जपे जाते है। जप का दशांश होम घृत द्वारा करना चाहिए । होम का दशांश तर्पण, तर्प्ण का दशांश अभिषेक तथा अभिषेक का दशांश ब्राह्मण – भोजन कराने का नियम है।
विशेष : -” दक्षिणा कालिका ” देवी के मन्त्र रात्रि के समय जप करने से शीघ्र सिद्धि प्रदान करते है। जप के पश्चात स्त्रोत, कवच, ह्रदय आदि उपलब्ध है, उनमें से चाहें जिनका पाठ करना चाहिए । वे सभी साधकों के लिए सिद्धिदायक है।
प्रथम महाविद्या काली
दस महाविद्या में काली का स्थान पहला है। उनके बारे में सबसे ज्यादा ग्रंथ लिखे गए हैं। उनमें से अधिकतर लुप्त हो चुके हैं। उनकी महिमा निराली है। क्रोध में भरी एवं दुष्टों के संहार में करने के लिए हमेशा तत्पर रहने वाली माता भक्तों पर हमेशा कृपा बरसाती रहती हैं। वह अपने साधक भक्तों को समय-समय पर अपनी उपस्थिति का आभास भी कराती रहती हैं। विभिन्न ग्रंथों में इनके कई नाम और भेद हैं जो विशिष्ट ज्ञान के लिए ही जरूरी है। सामान्य तौर पर इनके दो रूप ही अधिक प्रचलित हैं। वे श्यामा काली (दक्षिण काली) और सिद्धिकाली (गुह्य काली) जिन्हें काली नाम से भी पुकारा जाता है। ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, वरुण, कुबेर, यम,, महाकाल, चंद्र, राम, रावण, यम, राजा बलि, बालि, वासव, विवस्वान सरीखों ने इनकी उपासना कर शक्तियां अर्जित की हैं। इनके रूपों की तरह मंत्र भी अनेक हैं लेकिन सामान्य साधकों को उलझन से बचाने के लिए उनका जिक्र न कर सीधे मूल मंत्रों पर आता हूं।
एकाक्षरी मंत्र– क्रीं
इसके ऋषि भैरव ऋषि, गायत्री छंद, दक्षिण काली देवी, कं बीज, ईं शक्तिः एवं रं कीलकं है। यह अत्यंत प्रभावी व कल्याणकारी मंत्र है। इसकी साधना से ही राजा विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति हुई थी। शवरूढ़ां महाभीमां घोरद्रंष्ट्रां वरप्रदम् से ध्यान कर एक लाख जप कर दशांश हवन करें।
करन्यास व हृदयादि न्यास– ऊं क्रां, ऊं क्रीं, ऊं क्रूं, ऊं क्रैं, ऊं क्रौं, ऊं क्रं, ऊं क्र: से करन्यास व हृदयादि न्यास करें।
द्वयक्षर मंत्र– क्रीं क्रीं
ऋषि भैरव, छंद गायत्री, बीज क्रीं, शक्ति स्वाहा, कीलकं हूं है। बाकी पूर्वोक्त तरीके से करें।
काली पूजा प्रयोग
काली पूजा के सभी मंत्रों में 22 अक्षर वाले मंत्र को सबसे प्रभावी माना गया है। अन्य मंत्रों के प्रयोग में इसी मंत्र के अनुरूप पूजाविधान और यंत्रार्चन किया जाता है। इसका प्रयोग बेहद उग्र और आज की स्थिति में थोड़ी कठिन है। अतः मैं सामान्य जानकारी तो दूंगा पर साथ ही सलाह भी है कि सामान्य साधक इसके कठिन प्रयोग से बचें। यदि तीव्र इच्छा हो और उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हों तो योग्य गुरु के निर्देशन में इसे करें।
बाइस अक्षर मंत्र–
क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
विनियोग–
अस्य मंत्रस्य भैरव ऋषिः, उष्णिक् छंदः, दक्षिण कालिका देवता, ह्रीं बीजं, हूं शक्तिः, क्रीं कीलकं सर्वाभिष्ट सिद्धेयर्थे जपे विनियोगः।
अंगन्यास–
ऊं कुरुकुल्लायै नमः मुखे, ऊं विरोधिन्यै नमः दक्षिण नासिकायां, ऊं विप्रचित्तायै नमः वाम नासिकायां, ऊं उग्रायै नमः दक्षिण नेत्रे, ऊं उग्रप्रभायै नमः वाम नेत्रे, ऊं दीप्तायै नमः दक्षिण कर्णे, ऊं नीलायै नमः वाम कर्णे, ऊं घनायै नमः नाभौ, ऊं बालाकायै नमः हृदये, ऊं मात्रायै नमः ललाटे, ऊं मुद्रायै नमः दक्षिण स्कंधे, ऊं मीतायै नमः वाम स्कंधे। इसके बाद बूतशुदिध आदि कर्म करें। ह्रीं बीज से प्राणायाम करें।
ऋष्यादि न्यास–
भैरव ऋषिये नमः शिरसि, उष्णिक छंदसे नमः हृदि, दक्षिणकालिकायै नमः हृदये, ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये, हूं शक्तये नमः पादयोः, क्रीं कीलकाय नमः नाभौ। विनियोगाय नमः सर्वांगे।
षडंगन्यास–
ऊं क्रां हृदयाय नमः, ऊं क्रीं शिरसे स्वाहा, ऊं क्रूं शिखायै वषट्, ऊं क्रैं कवचाय हुं, ऊं क्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्, ऊं क्रः अस्त्राय फट्।
ध्यान
चतुर्भुजां कृष्णवर्णां मुंडमाला विभूषिताम्,
खडग च दक्षिणो पाणौ विभ्रतीन्दीवर-द्वयम्।
द्यां लिखंती जटायैकां विभतीशिरसाद्वयीम्,
मुंडमाला धरां शीर्षे ग्रीवायामय चापराम्।।
वक्षसा नागहारं च विभ्रतीं रक्तलोचनां,
कृष्ण वस्त्रधरां कट्यां व्याघ्राजिन समन्विताम्।
वामपदं शव हृदि संस्थाप्य दक्षिण पदम्,
विलसद् सिंह पृष्ठे तु लेलिहानासव पिबम्।।
सट्टहासा महाघोरा रावै मुक्ता सुभीषणा।।
विधि एवं फल–
सूने घर, निर्जन स्थान, वन, मंदिर (काली को हो तो श्रेष्ठ), नदी के किनारे एवं श्मशान में इस मंत्र के जप से विशेष और शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। 22 अक्षर मंत्र का दो लाख जप कर कनेर के फूलों से दशांश हवन करना चाहिए। काली की नियमित उपासना करने का मतलब यही होत है कि साधक उच्चकोटि का है और उसने पहले ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गौरी, गणेश, सूर्य और कुछ महाविद्या की उपासना कर ली है और अब वह साधना के चरम की ओर अग्रसर हो रहा है।
कुछ कठिन प्रयोग–
जो साधक स्त्री की योनि को देखते हुए दस हजार जप करता है, वह ब़हस्पति के समान होकर लंबी आयु और काफी धन पाता है। बिखरे बालों के साथ नग्न होकर श्मशान में दस हजार जप करने से सभी कामनाएं सिद्ध होती हैं। हविष्यान्न का सेवन करता हुआ जप करे तो विद्या, लक्ष्मी एवं यंश को प्राप्त करेगा।
गुह्यकाली के कुछ मंत्र
1-नवाक्षर– क्रीं गुह्ये कालिका क्रीं स्वाहा।
2-चतुर्दशाक्षर मंत्र– क्रौं हूं ह्रीं गुह्ये कालिके हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
3-पंचदशाक्षर मंत्र– हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
ध्यान
द्यायेन्नीलोत्पल श्यामामिन्द्र नील समुद्युतिम्। धनाधनतनु द्योतां स्निग्ध दूर्वादलद्युतिम्।।
ज्ञानरश्मिच्छटा- टोप ज्योति मंडल मध्यगाम्। दशवक्त्रां गुह्य कालीं सप्त विंशति लोचनाम्।
मंत्र सिद्ध यन्त्र माला सिद्धि हवन के लिए contact करें।
- आनंद वृद्धिनी काली मंत्र साधनाआनंदा वर्धिनी काली आनंद वर्धिनी काली की उत्पत्ति कथा आनंद का अर्थ आनंद और पंचकोश आनंद और आवरणा पूजन आनंद वर्धिनी काली सर्वोच्च देवी हैं जो प्रत्येक प्राणी में आनंद के रूप में निवास करती … Continue reading आनंद वृद्धिनी काली मंत्र साधना
- काम कला काली पूजन मंत्र बलि॥ अथ कामकलाकालि पूजाऽर्चा विधानम् ॥ बलि विधान शिव बलि पूर्वोक्त ध्यान मन्त्रों से देवी का आवाहन कर षोडशोपचार से पूजन कर बलि प्रदान करें । आवाहन – ॐ ह्रीं क्लीं आं कामकलाकालि देवि आगच्छ … Continue reading काम कला काली पूजन मंत्र बलि
- महाकाली नित्यास मंत्र साधना खडगमालामहाकाली खडगमाला साधनाइस महाकाली खडगमाला साधना से पुत्र हीन को पुत्र, धनहीन को धन की प्राप्ति होती है। वह धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष चारों का अधिकारी होकर दूसरों को वर प्रदान करने वाला बन जाता है। आकर्षण शक्ति … Continue reading महाकाली नित्यास मंत्र साधना खडगमाला
- कामकला काली साधनाKaamKala Mahakali काम कला काली गुप्त साधना – गुप्त काली मंत्र काम तंत्र साधना – ऊध्वमागे एवं कामख्या मार्गकाम तंत्र साधना के विषय में तंत्र के इन मार्गों में कहा गया है कि सृष्टि की … Continue reading कामकला काली साधना
- महाकाली साधनाकाली मंत्र काली मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ देवी काली पृथ्वी की दिव्य रक्षक हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में कालिका के नाम से जाना जाता है। लेकिन देवी की विनाशकारी शक्ति के कारण उन्हें काली … Continue reading महाकाली साधना
- भद्रकाली मंत्र साधनादेवी भद्रकाली का पूजन मंत्र साधना वामन व ब्रह्म पुराण में कुरुक्षेत्र स्थित चार कूपों का वर्णन है। जिसमें चंद्रकूप, विष्णुकूप, रुद्रकूप व देवीकूप हैं। यही देवीकूप मां भद्रकाली की शक्तिपीठ है। शिव पुराण के … Continue reading भद्रकाली मंत्र साधना
- काली महाकाली videoमहाकाली सनातन हिन्दू शिव शिव धर्म की देवी जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की प्रमुख शक्ति हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और शक्तिशाली रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों असुरों को नष्ट करने, दुष्ट … Continue reading काली महाकाली video
- महाकाली के रुप व वीडियोमहाकाली काली की गुप्त शक्ति Maha kali shakti 1 – kerkasni ( kam krodh nasht)2- shushakkanta (Heart atma )3- samaye trasani ( samaye dosh ko theek karti hai)4-Guhevedni (purv janam ke dosh katati haiकाली की … Continue reading महाकाली के रुप व वीडियो
- महाकाली मंत्र साधनामहाकाली मंत्र काली Maha Kali Tantra मंत्रकाली मां दुर्गा का ही एक स्वरुप है। मां दुर्गा के इस महाकाली स्वरुप को देवी के सभी रुपों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। दसमहाविद्याओं में काली का … Continue reading महाकाली मंत्र साधना
- महाकाली वशीकरण मंत्रमाँ काली वशीकरण प्रयोगः मां काली के शक्तिशाली मंत्र: ओम ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अमुकं वश्यं कुरु कुरु स्वाहा का कुल सवा लाख जाप कुल 11 दिनों में पूरा किया जाता है। जाप की शुरुआत … Continue reading महाकाली वशीकरण मंत्र
- महाकाली हवन यज्ञमहाकाली हवन यज्ञ ग्यारह दिनों के बाद मन्त्रों का जाप करने के बाद दिए गये मन्त्र जिसका आपने जाप किया हैं उस मन्त्र का दशांश ( 10% भाग ) हवन अवश्य करें ! हवन में … Continue reading महाकाली हवन यज्ञ
- महाकाली कवचम् ओर आरतीमहाकाली तंत्र मंत्र साधना रूद्रयामल तन्त्रोक्तं कालिका कवचम् विनियोग ॐ अस्य श्री कालिका कवचस्य भैरव ऋषिः, अनुष्टुप छंदः, श्री कालिका देवता, शत्रुसंहारार्थ जपे विनियोगः । ध्यानम् ध्यायेत् कालीं महामायां त्रिनेत्रां बहुरूपिणीं। चतुर्भुजां ललज्जिह्वां पूर्णचन्द्रनिभाननां।। नीलोत्पलदलश्यामां … Continue reading महाकाली कवचम् ओर आरती
- महाकाली तंत्र साधना वीडियोMahaKali Mantra Yogini Mantra Sadhana 10 MahaVidhya Hawan Online Service 10 महाविधा हवन सर्विस 🔥










